प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राजस्थान के चुरु में एक जनसभा के दौरान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भारतीय वायुसेना के हमले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है.
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने साल 2014 के चुनावी वादों को दोहराया, 'चुरु की धरती से मैं ये कहना चाहूंगा कि देश सुरक्षित हाथों में है...साल 2014 में, विजय शंखनाद युवा संगम के दौरान मैं मैंने अपनी आत्मा की बात आप सबके सामने रखी थी. मैं 2014 की बात कर रहा हूं. मेरी आत्मा कहती है - आज का दिवस, उस बात को फिर से दोहराने का दिवस है. चुरु की धरती से मैं फिर से एक बार 2014 के मेरे इन शब्दों को मां भारती के वीरों को नमन करते हुए आज मैं फ़िर से दोहरा रहा हूं.'
'सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा. मेरा वचन है, भारत मां को, तेरा शीष झुकने नहीं दूंगा. जाग रहा देश है, देश मेरा, हर भारतवासी जीतेगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा. देशवासियों हमें फिर से दोहराना है और खुद को याद दिलाना है. न भटकेंगे, न अटकेंगे, कुछ भी हो, हम देश नहीं झुकने देंगे. मैं देश नहीं मिटने दूंगा. आज के इस दिन पर, फिर एक बार, ये प्रधानसेवक नमन करता है'
राजस्थान में रैली के बाद पीएम मोदी दिल्ली पहुंचे और दिल्ली मेट्रो की सवारी कर इस्कान टैंपल पहुंचे जहां उन्होंने सबसे बड़ी गीता का विमोचन किया.
क्या बोले अमित शाह?
वहीं, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बालाकोट हमले पर खुलकर टिप्पणी दी है कि ये कार्रवाई नए भारत की इच्छाशक्ति को दर्शाती.
इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट किया है, "भारत की जाबांज सेना को उनकी बहादुरी और वीरता के लिए बधाई देता हूँ और उन्हें सलाम करता हूँ. आज की कार्रवाई ने यह पुनः साबित किया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व में भारत सुरक्षित है."
ओआईसी सदस्य देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, मोरक्को, ट्यूनिशिया और मिस्र जैसे देशों से भारत के द्विपक्षीय कारोबार और निवेश वाले संबंध काफी बेहतर हैं. अरब खाड़ी में करबी 60 लाख भारतीय रहते हैं और काम करते हैं, जिनमें आधे सऊदी अरब में रहते हैं.
इन लोग अपने देश में जितना पैसा भेजते हैं वह भारत के सालाना बजट का करीब 40 फ़ीसदी होता है. जबकि हर साल करीब डेढ़ लाख भारतीय मुसलमान मक्का मदीना की यात्रा करते हैं. खाड़ी देशों के लिए भारत निवेश का बेहतरीन ठिकाना माना जाता है. जबकि ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इराक भारत को तेल आपूर्ति करने वाले अहम देश हैं.
क्या मिल रहा है संकेत
भारत ने सूडान, सीरिया, ओमान और क़तर में पेट्रोलियम से जुड़े वेंचरों में निवेश किया है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को पेट्रोलियम मिलता रहे.
सीरिया और यमन के बीच जिस तरह से संघर्ष बढ़ रहा है और अरब देश जिस तरह से दो धुरी में तब्दील होते जा रहे हैं, जिसमें एक तरफ तो सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हैं और दूसरी तरफ़ क़तर है. हालांकि भारत की नीति अरब देशों के बीच दखल नहीं देने की रही है, लेकिन माना जा रहा है कि राजनीतिक तौर पर आपसी सहयोग लगातार बढ़ रहा है.
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संयुक्त अरब अमीरात के आमंत्रण के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्री को ओआईसी के उद्घाटन संत्र में संबोधन देना है जो एक तरह से भारत के संयुक्त अरब अमीरात के साथ ही नहीं बल्कि इस्लामिक देशों के साथ संबंधों का सूचक है.
ओआईसी देशों से भारत को जो चुनौती मिल सकती है, उसे संबोधित करने के लिहाज़ से ये भारत के सामने पहला अवसर होगा. ओआईसी के सदस्य देश कैसे काम करते हैं, इसे एक बार में बदलना तो संभव नहीं होगा लेकिन उस पर असर डाला जा सकता है.
हालांकि मोदी सरकार और भारत, दोनों के लिए ये किसी जोख़िम से कम नहीं होगा. हालांकि इसमें कामयाब होने पर यह जम्मू और कश्मीर की स्थिति और इस्लामिक देशों से भारत के रिश्ते दोनों को प्रभावित करेगा.
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