Friday, December 14, 2018

कांग्रेस में 1952 में हुए पहले चुनाव से ही होता रहा है सीएम के लिए सियासी संघर्ष

विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के तीन दिन बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को राजस्थान में मुख्यमंत्री तय किया। अशोक गहलोत तीसरी बार सीएम बनेंगे और सचिन पायलट डिप्टी सीएम होंगे। मुख्यमंत्री पद के लिए सियासी संघर्ष के बीच नाम फाइनल करने को लेकर दोनों नेताओं की कांग्रेस आलाकमान के साथ कई बैठकें हुईं।

1952 में राजस्थान के पहले चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी, तब भी सीएम पद की वजह से कार्यकर्ता दो गुट में बंट गए थे। एक ओर जयनारायण व्यास के समर्थक तो दूसरी ओर टीकाराम पालीवाल के। इसके बाद 1954 में मोहनलाल सुखाडिया को लेकर ऐसे ही हालात बने। 1998 में भी जब कांग्रेस ने बहुमत के साथ सरकार बनाई तो परसराम मदेरणा की जगह गहलोत को सीएम बना दिया गया।

1952 : जयनारायण vs टीकाराम

कांग्रेस जीती। मगर मुख्यमंत्री पद के  दावेदार जयनारायण व्यास दोनों सीटों से हार गए। लिहाजा टीकाराम पालीवाल सीएम बन गए। सालभर में ही व्यास उपचुनाव जीत फिर मुख्यमंत्री बन गए। राजस्थान के कांग्रेसियों को व्यास का इस तरह सीएम बनना पचा नहीं और उन्होंने विद्रोह कर दिया।

1954 : जयनारायण vs सुखाडिया

जयनारायण व्यास का विरोध इतना बढ़ गया कि विधायक दल के नेता के लिए दोबारा चुनाव कराना पड़ा। व्यास मोहनलाल सुखाडिया से आठ वोट से हार गए। सुखाडिया महज 38 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 17 साल राज किया। 1967 में कांग्रेस को बहुमत न मिलने के बाद भी वे सियासी तिकड़मों से जैसे-तैसे मुख्यमंत्री बने।

1971 : सुखाडिया vs बरकतुल्ला

इंदिरा गांधी 1969 के राष्ट्रपति चुनावों से ही सुखाडिया से नाराज थीं। लिहाजा उन्होंने सुखाडिया को सीएम पद से बेदखल करते हुए बरकतुल्ला खां को बैठा दिया। पर दो साल बाद 1973 में बरकतुल्ला की असामयिक मृत्यु हो गई। फिर सीएम पद के लिए हरिदेव जोशी और रामनिवास मिर्धा में मुकाबला हुआ,जिसमें जोशी जीते। तब भी सियासी माहौल गर्मा गया था।

1998 : परसराम मदेरणा vs गहलोत

कांग्रेस 153 सीटों के भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी तो माना जा रहा था कि जाटों के जबरदस्त समर्थन से कांग्रेस को यह कामयाबी मिली है। तब वरिष्ठ जाट नेता परसराम मदेरणा नेता प्रतिपक्ष थे और अशोक गहलोत प्रदेशाध्यक्ष। आलाकमान की पसंद पर गहलोत सीएम बने। जाट नाराज हो गए, जिसका खामियाजा बाद के चुनावों में भुगतना पड़ा।

2008: सीपी जोशी vs गहलोत

कांग्रेस के फिर से सत्ता में आने के बाद सीपी जोशी प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते सीएम पद के बड़े दावेदार थे, लेकिन वे एक वोट से चुनाव हार गए। बुजुर्ग कांग्रेसी नेता शीशराम ओला ने ताल ठोंक दी। दिग्विजय पर्यवेक्षक बनकर आए। कांग्रेस आलाकमान ने गुप्त पर्चियों से राय जानी। इसमें अशोक गहलोत विधायक दल के नेता चुने गए।

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